मिट्टी के क्षरण की जांच
मृदा क्षरण या मिट्टी का क्षरण भूमि की सतह पर मिट्टी की वह क्षति है जो गुरुत्व, पवन, पानी या बर्फ के कारण होती है। भारत में पवन और पानी से होने वाला क्षरण भूमि अवक्रमण की मुख्य प्रक्रियाएं हैं। अत्यधिक वर्षपात से पोषक तत्त्व बहकर निकल जाते हैं और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी उत्पन्न करते हैं, जबकि पवन मिट्टी को सुखाकर भूमि को हानि पहुंचाता है और साथ ही मिट्टी के सूक्ष्म कणों, विशेष रूप से जैविक पदार्थ, चिकनी मिट्टी और दुमट को उड़ाकर ले जाता है जिससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। मिट्टी को होने वाली क्षति को रोकने और नमी या आर्द्रता के संरक्षण को बढ़ाने के लिए मेड़ बांधने, ठूंठों को घास-पात से ढकने तथा घासदार जलमार्ग जैसे पारंपरिक तरीके अपनाए जाते हैं। मृदा संरक्षण के उपाय मिट्टी में सुधार लाने, मिट्टी की क्षति को रोकने, आर्द्रता या नमी का संरक्षण करने और मिट्टी की उत्पादकता को बनाए रखने में मदद करेंगे। इन उपायों में वातरोधी या सुरक्षा पट्टी और रिसाव गड्ढ़ों वाले मिट्टी के जलकुंड और चेक बांध तथा गैबियन वॉल या पीपों की दीवार जैसे इंजीनियरिंग उपायों का उपयोग किया जाता है।