मिट्टी की नमी का संरक्षण करना
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वानस्पतिक प्रतिरोधक पट्टियां : प्रतिरोधक या बफर और छनन या फिल्टर पट्टियां स्थायी वनस्पति के ऐसे क्षेत्र होते हैं जो खेतों और जल मार्गों के बीच और उनके भीतर स्थित होती हैं और इन्हीं जलमार्गों को वे खाली करती है। इन प्रतिरोधक पट्टियों का अभीष्ट जल बहाव को बीच में रोकना और गति को धीमा कर देना होता है और इस प्रकार वे मिट्टी की हानि को कम करती हैं। इसके अतिरिक्त अनेक इनका अभीष्ट प्रतिरोधक या बफर के नीचे जड़ क्षेत्र से होकर बहने वाले उथले भूमि जल को बीच में रोकना होता है। |
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परिरेखा या घेरे की मेढ़ें वह रणनीति है जो जड़ों की बेहतर पैठ को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी के क्षरण को कम से कम करती है और नमी या आर्द्रता के संरक्षण को बढ़ावा देती है। |
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मल्चिंग या घास-पात से ढकना
मल्चिंग या घास-पात से ढकना एक सांस्कृतिक प्रथा है जिसकी अनुशंसा प्रायः सब्जियां उगाने में की जाती है और इसमें घास-पात सामान्य रूप से पत्तियों और फूस या पुआल का रक्षात्मक आवरण होता है जो पौधों के चारों ओर लगाया जाता है। फसल के ऊपर सूखी पत्तियां बिछाकर वाष्पोत्सर्जन के कारण होने वाली पानी की क्षति को नियंत्रित किया जाता है। |
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रेत के टीलों का स्थिरीकरण रेत के टीलों को वनस्पति का आवरण और रेत की बाड़ लगाकर स्थिर किया जा सकता है। दरकते या छीजते हुए टीलों की सतह के ऊपर उपयुक्त वनस्पति लगाने के परिणामस्वरूप सतह की पवन गति कम होती है, अपरदन या बुहरने की गतिविधि की रोकथाम होती है और मिट्टी की स्थितियों में सुधार आता है, जो अंततः उस क्षेत्र की सूक्ष्म जलवायु स्थितियों में सुधार की ओर ले जाती है। रेत के टीलों के स्थिरीकरण के लिए उपयोग की गई वनस्पति नीचे लिखी चीजों के बाद भी बचने में समर्थ होनी चाहिए :
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मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाना : खेत को सूखे से निपटने के लिए समर्थ बनाने में स्वस्थ मिट्टी का अत्यधिक महत्त्व है। स्वस्थ मिट्टी पानी के प्रवेश और पैठ को बढ़ाने में सहायता करती है, पानी को अधिक अच्छी तरह थामकर रखती है और पोषक तत्त्वों को पौधों के लिए अधिक सुलभ बनाती है।
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